आप अपनी मंजिल-ए-मक़्सूद पर ज़रूर पहुंचते हो अगर पक्का ईरादा लेकर घर से निकलते हो
जब-तक आप रुकते नहीं हो इस से कोई फ़र्क नहीं पडता है कि आप कितने धीरे धीरे चलते हो
-एन. आर. कस्वाँ
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