आदमी हर हाल में खुद को सम्भाल लेता है
दुख की घड़ीमें भी खुशीके पल निकाल लेता है!
रंज-ओ-ग़म मायूसी मलाल उदासी हताशा
हर निराशा में आशा की किरण निकाल लेता है!
-एन. आर. कस्वाँ
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