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नजरों से दूर होकर

                
                                                         
                            नज़रों से दूर होकर
                                                                 
                            
बस खयालों में ही
आते रहोगे ?
कब तक यूँ हीं
इम्तिहान हमारा
लेते रहोगे ?
लबों पे आकर
खामोश हुआ है जो
दर्द दिल का
क्या कभी उसे
समझने की
कोशिश भी करोगे ?
-नंदकुमार भागवत
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3 महीने पहले

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