दूरियां इतनी न बढ़े कि
गैर लगने लगो
खामोशियां इतनी न हो
कि पराये लगने लगो
वैसे रिश्ते तो दिल से
निभते हैं दूरी से नहीं
मगर इतने करीब रहो कि
अपने लगने लगो
-नंदकुमार भागवत
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