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छुपाए भी तो छुपी न जाए

                
                                                         
                            मुझे तुम से मुहब्बत हैं ये कहने की भी क्या जरूरत हैं
                                                                 
                            
छुपाए भी तो छुपी न जाए छुपेगी कैसे जो हकीकत हैं

तेरी अदाओं से धड़क उठती हैं आज भी साँसें मेरी
तेरे ख़ामोश लबों में दुनिया की सबसे मीठी शरारत है

तेरे गेसुओं की खुशबुओं से जब खुलती हैं मेरी आँखे  
आंखों में समा भी नहीं पाती तुझमे जो नजाकत हैं

चाँद भी फीका लगता है तेरे चेहरे की चमक के आगे
तेरी मुस्कान की रौशनी ही मेरे गम के अंधेरे में राहत है

छोड़ कर तुम्हे भला कहीं और मैं जा भी कहां सकता हूं
आखिर  मेरा दिल भी तो  तुम्हारी ही अपनी रियासत हैं

मुझे अपना गुलाम बनाकर मुझे अपना खुदा कहती हो
दिल दे चुके सनम जिसपर यहीं वो तुम्हारी मासूमियत हैं

आंखों के समंदर लबों के प्याले यूहीं न अब जाया करो
कैद तुम्हे  कर लेंगे बाहों में अपनी  अगर इजाजत हैं
-नंदकुमार भागवत
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3 महीने पहले

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