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स्मित मुस्कान

                
                                                         
                            जब भी बगिया एक गुलाब खिलती है तो
                                                                 
                            
छोटी-सी बगिया गुलजार हो जाती है
एक हसीना बगिया में अक्सर आती है
जब भी स्निग्ध सुंदरी बगिया में आती है
मैं भी गौर फरमाता हूं कि उसकी
स्मित मुस्कान से बगिया के सभी पुष्प
अपने- आप अकस्मात खिल जातें हैं
जब भी बगिया के किनारे की
बेन्च पर आंखें मुन्दे बैठा रहता हूं
जब भी बाग में प्रवेश करती है
एक तीव्र सुगंधित तेज झोका
मेंरे आंखों को खोल देती है
वह होले सी आकर मेरे समीप बेठ जाती है
मेरो आंखें खुल कर बंद हो जाती है
वो जांघों पुनः थपथपाती है
फिर मेरीं आंखें खुल जाती है
पर मैं देखता हूं वहां कोई नही है
विछोह को महसूस करता हूं
पर एक स्मित मुस्कान के साथ आती है
और मुझे आकाश की ओर ले जाती है
मैं आकाश से देखता हूं
कि बेन्च पर पड़ी नश्वर शरीर लुढ़क पड़ी है
स्मित मुस्कान अब भी तडफाती है
- भागवत प्रसाद नायक
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3 महीने पहले

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