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कुलदीपक

                
                                                         
                            यूं तो हर दिन पैदा होती हैं लाखों संतान
                                                                 
                            
अपने साथ लाती हैं कई सारे अरमान,
अरमानों को पूरा करने की चाह में
कुलदीपक भटक जाते हैं अपनी राह में ,
उन्हें अपने भटकने का एहसास नहीं होता
क्योंकि मां-बाप का साया साथ नहीं होता,
और फ़िर एक दिन ऐसा भी आता है
जब वही कुलदीपक कुलनाशक बन जाता है!!


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6 वर्ष पहले

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