चलो चलें आज
उस नीरवता के जंगल में
नमस्कार करेंगे डूबते सूरज को
अभिनन्दन करेंगे ,
पराजित, तिरस्कृत, महान योद्धा कर्ण को
अडिग रहा जो अपने निश्चय पर
जानता था हर छल , प्रपंच को।
चलो चलें आज
उस नीरवता के जंगल में
खोजेंगे और पूछेंगे
उस ज्ञानी , महान राजनीतिज्ञ कृष्ण से
करवाया पहचान नई कुटनीति, युद्धनीति से
धन्य था वह महामानव
हजारों साल पहले बतला गया
आज की दुनिया का ढंग निराला।
चलो चलें आज
उस नीरवता के जंगल में।
-नाग मणि
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X