हम भविष्य पुराण संग महाभारत धर्म कर्म लिखते है।
नीरज भाविष्य पुराण पावन कविता लिखते हैं।
मां करवा चौथ की महिमा वेदों ने बतायी हैं।।
हां पति की आयु संग सती व्रत की रीति निभायी हैं।,
सती सावित्री ने यम से पति सत्यवान प्राण बचाए ह।
सुहागन मां चौथ माता का व्रत रखती है। ,
व्रत पर्व अखंड सौभाग्य , मंगल पातीं हैं।
प्रातः. सरगी खाए सास ससुर आशीष देते हैं।
सच दिन भर निर्जला तप जप शुद्ध रहतीं हैं।
पुराणों की कथा शिव-पार्वती संग गणेश कहती सुनती है।
सावित्री-सत्यवान की कथा सच कहती है।
ग्रंथ द्रौपदी में कृष्ण लीला सुनते हैं।
हम सब मेहंदी चूड़ा बिंदी संग सोलह श्रृंगार करती हैं।
हां चांद के दर्शन पति का सहयोग करते हैं।
आज संध्या को थाली सजाए दीपक जलाते हैं।
हम छलनी में दीप पति परमेश्वर होते हैं।
सच चांद को अर्घ्य साथ पति से जल व्रत पूर्ण करते हैं।
रीति रिवाज जन्म-जन्म का बंधन बन जाता है।
पुराण कहे प्रेम ही करवा चौथ धर्म निभाते हैं।
आओ हम करवाचौथ संग नारी के सतीत्व का मर्म कहते हैं।
-नीरज कुमार अग्रवाल
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