आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

ए जिंदगी ए जिंदगी

                
                                                         
                            ऐ जिंदगी तू मुझे ना चिढ़ा
                                                                 
                            
मेरे घर में मेरी हँसी ना उड़ा
माना तुझे नाज है खुद पर
मुझे भी एतबार है खुद पर
मेरी वफाओं के बदले
मुझसे बेवफाई तो न कर
प्यार ना सही पर
नफरत तो ना कर
मुझ पर ही टिका है
तेरा भी वजूद
ज़रा आहिस्ता चल
ऐ जिंदगी थोड़ा रुक
सुस्ता जरा...
जाना है बहुत दूर मुस्कुरा जरा...
ख्वाबों का आकाश छू लेने दे
इतना ना रूठ
थोड़ा जी लेने दे
थोड़ा जी लेने दे!!
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर