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याद कर मन फिर से मचलता है।

                
                                                         
                            जब खुलती थीं आँखें,
                                                                 
                            
तो अज्ञान ही मेरा संसार था,
हर पल में बचपन की चंचलता,
हर चेहरे पर प्यार था।

स्कूल की घंटी बजती,
तो मन में उमंगें भर जातीं,
किताबों के उन पन्नों में
नई-नई दुनिया बस जाती।

मेरा स्कूल, मेरी दुनिया,
वह बचपन का प्यारा संसार,
कभी शरारत, कभी अनुशासन,
कभी सपनों की बहार।

बालमन लेकर दौड़ते थे,
हर पल खुशियों के साथ,
अनुशासन और शिक्षा ने
दिखलाया जीवन का मार्ग।

धीरे-धीरे गुजरने लगे
बचपन के वे सुनहरे लम्हे,
कल तक जो अपने लगते थे,
आज दूर हुए वे रिश्ते।

जब मुड़कर देखा पीछे,
तो बदली हुई थी दुनिया,
छूट गया वह बचपन सारा,
और बदल गई जीवन की राह।

अब हर नया कदम लगता है
जैसे कोई नया इम्तिहान,
जो कल तक खेल था जीवन,
आज बन गया है जिम्मेदारियों का जहान।

समय ने बहुत कुछ सिखाया,
हर रिश्ते का मतलब समझाया,
हँसते-हँसते जीवन में
कितना कुछ पीछे छूट आया।

फिर भी मन के किसी कोने में
वह बचपन आज भी पलता है,
बीते हुए उन सुनहरे दिनों को
याद कर मन फिर से मचलता है।

धीरे-धीरे गुजरते हैं लम्हे,
बीतते जाते महीने और साल,
पर बचपन की वे मीठी यादें
रहती हैं दिल में हर हाल।
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एक घंटा पहले

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