वो हिन्दू है ,यह मुस्लिम है, वो है जाति विशेष का,
धर्म-जाति और उम्र का मानक, तय करने का क्या अधिकार?
विभिन्न मानकों मे विभक्त कर,क्या क्लेश मिट जाता है?
किसी पीडिता के जख्मों का, दर्द कहां मिट पाता है
इन जघन्यतम अपराधों पर,राजनीति तुम बन्द करो,
एक देश मे, एक केस मे, सजा एक ही क्यों न हो?
मत मेरा है यदि सहमत हो, तो आकर स्वीकार करो
थर -थर कांपे रूह दरिन्दों की तुम ऐसा न्याय करो वो हिन्दू है ,यह मुस्लिम है, वो है जाति विशेष का,
धर्म-जाति और उम्र का मानक, तय करने का क्या अधिकार?
विभिन्न मानकों मे विभक्त कर,क्या क्लेश मिट जाता है?
किसी पीडिता के जख्मों का, दर्द कहां मिट पाता है
इन जघन्यतम अपराधों पर,राजनीति तुम बन्द करो,
एक देश मे, एक केस मे, सजा एक ही क्यों न हो?
मत मेरा है यदि सहमत हो, तो आकर स्वीकार करो
थर -थर कांपे रूह दरिन्दों की तुम ऐसा न्याय करो
इन वहशी हत्यारों की, जब खुलेआम फांसी होगी
तभी हमारी बहन-बेटियों की आबरू सुरक्षित होगी।।
मोहित यादव मुग्ध
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