उन ढाई आखर से जरा इजहार कीजिये
मै प्यार का मारा हूं मुझे प्यार दीजिये
सूना पडा है दिल मेरा खाली मकान सा
आकर बहारों से इसे गुलजार कीजिये
- मोहित यादव `मुग्ध'
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