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ऐसा हिंदुस्तान रे

                
                                                         
                            हर मुख पर हो प्रेम की भाषा हर मन में इंसान रे
                                                                 
                            
हमें चाहिए एक बार फिर ऐसा हिंदुस्तान रे

भले न मैं उसके घर जाऊँ, भले न आए वो मेरे घर
पर रस्ते में मिलें तो पूछें बोलो सब कैसे हैं घर पर
गिरे सड़क पर जफर ख़ान तो राघव दौड़ा दौड़ा आए
हेमलता का हाथ पकड़ कुलमिंदर पुलिया पर कराए
ओ देशवासियों यही तुम्हारी है असली पहचान रे

किसी सियासी चाल का मारा आए गिराने गर गुरुद्वारा
हिंदू मुस्लिम मिल कर कह दें सब सुन लो ये घर हे हमारा
शुभ दीवाली में बोलूं और तुम बोलो मुझे ईद मुबारक
इन शब्दों से क्या होगा बस प्रेम बढ़ेगा आसमान तक
हिंदू की सिख जान बनेंगे सिख की मुसलमान रे
हमें चाहिए एक बार फिर ऐसा हिंदुस्तान रे
-बुशरा ख़ानम "मुहब्बत "
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8 महीने पहले

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