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मोहब्बत उबासियां ले रही है...

                
                                                         
                            मोहब्बत उबासियाँ ले रही है
                                                                 
                            
चलो उसका दिल बहलाया जाए
बर्फ़ से ठंडे एहसासों को
हौले-हौले से गरमाया जाए

भले ही बालों में
चांदी चमकने लगी हो..
या उम्र थोड़ी-थोड़ी सी
सरकने लगी हो..
बावरे-मन , उतावलेपन को.
आंखों में फ़िर से सजाया जाए..

मोहब्बत उबासियाँ ले रही है
चलो उसका दिल बहलाया जाए..
बर्फ़ से ठंडे एहसासों को
हौले-हौले से गरमाया जाए..

दरवाजे अरमानों के
उड़का के छोड़ देना हो...
या अंगड़ाइयां चाहतों की
कोई और मोड़ देना हो...
मन की तरंग, मन की उमंगों को
दिल में फ़िर से बसाया जाए..

मोहब्बत उबासियाँ ले रही है
चलो उसका दिल बहलाया जाए
बर्फ़ से ठंडे एहसासों को
हौले - हौले से गरमाया जाए !!
-मीना गोपाल त्रिपाठी
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50 मिनट पहले

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