“मैं ख़ामोश हूँ, मगर मेरी ख़ामोशी में शोर बहुत है,
जिसे अपना समझा था, उसी से दिल को गिला और बहुत है।
मैंने रिश्ते बचाने में ख़ुद को कहीं खो दिया,
और दुनिया ने समझा—मुझे कोई दर्द ही नहीं हुआ।
कुछ ज़ख़्म दिखाई नहीं देते, फिर भी उम्रभर रहते हैं,
कुछ लोग दूर होकर भी दिल के सबसे क़रीब रहते हैं।
अब शिकायत नहीं किसी से, न कोई सवाल बाकी है,
बस एक ख़ामोश-सी मुस्कान है…
और उसमें छुपी पूरी कहानी बाकी है।”
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