आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

पुलवामा के वीरों को श्रद्धांजलि

                
                                                         
                            पुलवामा के वीरों की
                                                                 
                            
होगी कभी न शहादत फीकी
पीढ़ियां रखेंगी दिलों में जिंदा
वीरता से लड़े हो आप
न होने दिया हिंद को शर्मिंदा।
लहू का एक एक कतरा
वो अमिट निशान छोड़ गया है
उसी खून के खौफ से आज
एक एक आतंकी हिंदुस्तान छोड़ गया है।
मिट गए हैं हमें मिटाने वाले,
बांटने का सपना सजाने वाले।
रूह भी अब उनकी कांप जाएगी,
जो नजर भी अब इस ओर उठ जाएगी।
यही जज्बा है अब भी हमारे वीरों का,
घायल जवानों के भी बुलंद हैं हौसले-
आग बुझी नहीं है अब भी उनके तीरों का।
आपकी याद में अश्रुपूरित हैं आंखें हमारी,
निशानियां चूम रहे हैं देशवासी तुम्हारी।
शहीदों को शत् शत् नमन,
श्रद्धा के दो कुसुम अर्पित कर रहे हैं हम।

लेखक- मो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर
सलेमपुर, छपरा, बिहार।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर