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अपनों का जब साथ मिले

                
                                                         
                            चारु चन्द्र की शीतल किरणें, सबके उर को नित भाती ।
                                                                 
                            
अपनों का जब साथ मिले तो, सारी चिंता मिट जाती।।

पुलकित हो जाता है जीवन, प्रेम डगर जिसने जानी।
सुलभ सरल परिवार जहाँ हो, अंगारा  लगता पानी।।
निर्मल सौरभ घोल रहा यों, बनती अनुरागी पाती,
अपनों का जब साथ मिले तो, सारी चिंता मिट जाती।।


मन से कायरता  त्यागे जो, अँधियारा सब  मिट जाता।
हर पल उत्सव-सा लगता है, मधुरिम सरगम उर गाता।
रिश्तों की यह नेहिल डोरी,  भोर प्रभा लेकर  आती,
अपनों का जब साथ मिले तो, सारी चिंता मिट जाती।।

समरसता का भाव समर्पित, बहे सुधा की रस धारा।
ईश्वर की करुणा सम लगती, सुरभित लगता जग सारा।
शुभ ढ़ाढस मिलता है जब-जब, तब होती चौड़ी छाती ।।
अपनों का जब साथ मिले तो, सारी चिंता मिट जाती।।
-मानसी मित्तल
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एक घंटा पहले

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