धरती खोदी
मिट्टी खोदी
पहाड़ खोदा
लोहा खोदा
तेल खोदा
पानी खोदा
तो भी में कुछ नहीं बोली
धर्य जब मेरी डोली
तब मेने मुह खोली
जब जनता भूकंप बोली!
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