खिंचते चीर
बेबस सी बेटियां
बहता नीर।
लज्जित मन
हंसते बलात्कारी
नोंचते तन।
चुप संसार
बिलखतीं बेटियां
मिले न प्यार।
हो जा तैयार
मिटा दे बलात्कारी
कर संहार।
कर प्रहार
खत्म हों बलात्कार
न हो लाचार।
मनोज यादव
कानपुर उत्तरप्रदेश
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