बहुत शोर है बाहर
भीतर की खामोशी
सुनेगा कौन
जुबां चुप हो जाए गर
नयनों की बोली
समझेगा कौन।
-मं शर्मा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X