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बेज़ुबान

                
                                                         
                            अंजान थे
                                                                 
                            
तो सुकून था
सब जान कर
हलकान हुए

बेजुबान थे
तो गज़ल थे
बखान कर
दीवान हुए

तन्हा थे
तो आबाद थे
भीड़ होकर
वीरान हुए

नज़र में थे
नज़रअंदाज थे
ओझल होकर
अरमान हुए

जिंदा थे
तो जश्न थे
मर कर
मसान हुए ।
 
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43 मिनट पहले

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