महज़ शब्द थे
दिल पे क्यों ले लिए
तीर थोड़े थे
अलिखित संवाद थे
अधूरे क्यों रह गये
लफ्ज़ तो शेष थे
दर तो खुले थे
दस्तक क्यों दे दिए
हम चुके थोड़ी थे।
-मं शर्मा
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