जब सुन ले, कोइ अपनी व्याधि
उमर हो जाती, उसकी आधी।
इसके पीछे, मनो विज्ञान
डर जाता है, वो नादान
तांडव करती मृत्य, मन में
खुशियां गायब,हो जाती, क्षण में,
पल पल मौत की आश लगाए,
भय मृत्यु का कहीं ना जाए।
अंधकार छा जाता मन में,
जान नहीं बचती है, तन में।
तन से बड़ी है, मन की व्याधि
समय से पहले, ले लेता समाधि।
व्याधि ग्रस्त से जिक्र ना करना,
जी जाएगा, फिक्र ना करना,
मृत्यु का एक नीयत समय है
उससे पहले नहीं, कोई डर है...
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