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स्मृतियां

                
                                                         
                            सोंधी,कड़क सुबह की चाय,
                                                                 
                            
बाबूजी की याद आ जाए,

बाबूजी का प्रिय पेय,
मेरी आदत, उनको श्रेय।

सुबह में पीते थे, दस बार,
टोंका टोकी था, नागवार।

बाबूजी अब नहीं रहे,
शेष उनके, कहकहे रहे,

सुबह की चाय पी रहा, अकेले,
स्मृतियों में लगे हुए हैं, मेले।

फीकी लगती सुबह की चाय
बाबूजी बिन अब ना भाय।
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एक वर्ष पहले

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