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सर्दी

                
                                                         
                            इन सर्दियों में, कुछ खास है
                                                                 
                            
रूमानियत का मोह पाश है।

ठंडी हवाओं के झोंके,
हसीन ख्वाबों के खुलें, झरोखे।

सन्नाटे में डूबी, लंबी रातें
तिलिस्मी नज़ारे, चांदनी की सौगातें।

रूई के फाहे सी नर्म ओस
मद मस्त फूलों को रहा नहीं होश।

प्रणव लालसा, आतुर श्वास
धूप की किरणों का लंबा वनवास।

लहू बदन के जम से जाते,
ऐसा है ये सर्दी का मास।
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एक वर्ष पहले

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