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नजरों का खंजर

                
                                                         
                            नज़रें थी उनकी, खंजर , दिल में उतर गई,
                                                                 
                            
इरादा तो नेक ना था, मगर मेरी दुनिया संवर गई,

मुझे देखने का उनका, अंदाज और था,
अंदाज ए बयान नजरों की, दिल में उतर गई,

हंसते है ज़ख्म मेरे, मै रो रहा बेपनाह
महसूस कुछ तो होता, वो अहसास मर गई,

मुझे होश हो तो सोचूं, क्या हुआ है मेरे साथ,
तेरे इश्क में, मेरे हमदम, मेरी तो नजर गई

कई रात का जगा हूं, अब नींद आ रही,
इस नींद की कोशिशों में, कई रातें गुजर गई,

अब ख्वाब में भी मुझको, तेरी तलाश है,
तुझे ढूंढने में मेरी, सारी उमर गई...
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एक वर्ष पहले

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