मै जैसा था,
वैसा ही हूं,
वैसा ही रहूंगा।
गैर को अपना,
अपनो को गैर, नहीं कहूंगा।।
सिद्धांत ही जिंदगी है, मेरी,
अनैतिक मूल्यों के साथ, नहीं चलूंगा।
उगते सूरज को पूजते है, सब
मैं सूरज के अवसान को भी, नमन करूंगा,
अंतर और बाह्य सबका है, अलग
मै दोनों को एक ही रखूंगा,
संवेदनाओं के आवर्त में, जो भी आया,
उन सबको हृदयस्थ रखूंगा।
मै जैसा था,
वैसा ही हूं,
वैसा ही रहूंगा।
गैर को अपना,
अपनो को गैर, नहीं कहूंगा।।
जो फूल मेरी किताब में सूखे है,
वो बस किसी के प्यार के भूखे है,
वो फूल मेरी जिंदगी का हिस्सा है,
बरसों पुराना एक किस्सा है,
उन सूखे हुए फुलों में,
मै मर के जिऊंगा,
मै जैसा था,
वैसा ही हूं,
वैसा ही रहूंगा।
गैर को अपना,
अपनो को गैर, नहीं कहूंगा।।
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