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इश्क की हलचल

                
                                                         
                            तेरे पेशानी पे बल, दिखता है
                                                                 
                            
इश्क सा, आंखों में, हलचल दिखता है।

चेहरा बेनूर सा हो गया है, अब
एक वीराना सा, महल दिखता है।

होठ सूखे से, नाक भन्नाई हुई,
जिस्म, मोहब्बत का दलदल दिखता है।

बात करने का अंदाज वही है, लेकिन
अदा की शोखी में, कुछ तो समतल दिखता है।

दिलो दिमाग उधेड़बुन में है,शायद
तेरे चिलमन में, क्यूं ! चहल पहल दिखता है।

खोए रहते हो, गुम ख्यालों में,
प्यार सा एक, एक हसीं कंवल दिखता है।

शायरी मेरी पसंद आए तुम्हे,
मुझको तो, तुझमें, हर पल दिखता है।
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एक वर्ष पहले

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