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इश्क का पैबंद

                
                                                         
                            मेरे महबूब की एक बात मुझे पसंद नहीं,
                                                                 
                            
उसके लिबास में, मेरे इश्क का पैबंद नहीं।

महंगे लिबास है उसके, जिनमें हीरे, मोती जड़े
पर मेरे इश्क के पैबंद में है, जादू बड़े

जब लगेंगे तेरे लिबास में, मेरे इश्क के पैबंद,
प्यार परवान चढ़ेगा, हंसेगा मंद मंद।

कई रंगों का ये पैबंद, हिस्सेदारी है
मेरा भी हक है, तेरे इश्क पर, ये वफादारी है

इश्क़ समंदर है, इसमें खोने का, बड़ा खतरा
गर मैं खो जाऊं कभी, और तू बहाए अश्क का कतरा,।

तेरे लिबास के ये पैबंद, देंगे ढांढस
मै बनके खुशबू आ जाऊंगा दौड़ा, बरबस

जब कभी तुझको, मेरी याद आएगी
मैं हमेशा रहा तेरा, ये पैबंद , तुझे बताएगी
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एक वर्ष पहले

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