मेरी जिंदगी का बस यही फलसफा है,
नुकसान भी कोई ना हो, ना ही नफा हो,
जरूरत पूरी होती रहे, ये ही काफी है,
गुनाह कोई ना हो, ना ही माफी हो,
रईस नहीं बनना, ना ही फकीर हो,
कोई काम करूं ऐसा, जो एक नजीर हो,
गर बन सके मिशाल कोई, बहुत ही अच्छा है,
ना बादशाह बने तो, कम से कम, एक वजीर हो
कोई आरजू नहीं है, ना ही कोई गिला है,
जो मिल गया, वो मुझको तकदीर का सिला है,
दौलत का नहीं शौक, ना शौक मशहूरियत का,
बस इतना चाहता हूं, मेरा दिल अमीर हो।
कर जाना चाहता हूं, मै वसीयत ए जिंदगी,
मेरा हमनवा ना हो कोई, ना ही कोई पीर हो।
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