आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

दुनियादारी

                
                                                         
                            जिसके ना हो बीवी, बच्चे
                                                                 
                            
वो उमर भर रहते, अकल के कच्चे

बीवी सिखा देती, दुनियादारी
बच्चे सिखाते, तरफदारी।

सहनशीलता बढ़ती, बीवी के तानों से
उद्यमशीलता आती, बच्चों को मनाने से

बीवी के सवालों से, शुरू होती अभिनय यात्रा,
बच्चों को पढ़ा, ज्ञानार्जित करते सही मात्रा

बीवी के आसुओं से, हो जाता ब्रह्मज्ञान
बच्चों का रोना, सिखाए सुर, तान

बीवी, बच्चे बनाते, बहुमुखी प्रतिभा के धनी,
पढ़ कर कविता, बीवी की भृकुटि तनी।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर