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चाँदनी घुल रही है तेरे गालों पर

CHANDNI GHUL RHI HAI TERE GAALON PAR
                
                                                         
                            चाँदनी घुल रही है तेरे गालों पर
                                                                 
                            
सारा आकाश तारों से है भर गया

मखमली घास से ओस चुनते हुए
रात तू मुस्कुराई तो मैं मर गया

तेरे हाथों की मेंहदी की सौंधी महक
शब्द बनकर मेरे गीतों में रच गयी .
मैंने छेड़ा तरन्नुम तेरे हुस्न का
मेरी सांसों में धुन बनके तू बस गयी

रात काटी है करवट बदलते हुए
तू मेरी आँखों में ऐसे रहकर गया

तेरे माथे की बिंदिया का सिंदूरी रंग
उगते सूरज की तरह चमकता रहे
तेरी खुशबू में भीगा हुआ मेरा मन
सुबह से शाम तक तुमको तकता रहे

कुछ न बाकी रहा इश्क़ के खेल में
दिल तुम्हारी तमन्ना में सब कर गया

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8 वर्ष पहले

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