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बावरे

                
                                                         
                            गोरी तेरे हुस्न का जादू,
                                                                 
                            
हम तो हुवे है, बावरे,
गरम मिजाज के आशिक़ है हम,
धूप में लगती छांव रे।

करवट बदल के रात गुजारूं,
दिन भर अपने केश सवारूं,

नयनों में है सूरत तोहरी,
मुख पे तेरा ही नाम रे।

गोरी तेरे हुस्न का जादू,
हम तो हुवे है, बावरे,
गरम मिजाज के आशिक़ है हम,
धूप में लगती छांव रे।

चंचल चित ना मोरी सुनता,
ख्वाब हजारों खुद ही बुनता,

तोरी सूरत दूधिया गोरी,
हम तो जनम से सांवरे,

गोरी तेरे हुस्न का जादू,
हम तो हुवे है, बावरे,
गरम मिजाज के आशिक़ है हम,
धूप में लगती छांव रे।
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एक वर्ष पहले

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