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तो आओ धर्म पे बात करें

aao dharm pe bat karein
                
                                                         
                            जो सुलझ गये हैं सड़े हुए समाज के
                                                                 
                            
तमाम जनहित से जुड़े मसाइल
तो आओ धर्म पे बात करें 

घर से गायब हो चुके आँगन और
विलुप्त होने की दहलीज़ पे खड़ी छत
के अहाते में आकर सुस्ताने वाली चिड़िया
को अगर अब भी उड़ने के लिए
मुहैया है सारा आकाश
तो आओ धर्म पे बात करें 

फूल सरीखे बच्चों का घर के परिचित,
स्कूल के शिक्षक, कर्मचारी द्वारा
किया जाने वाला यौन शोषण
हो गया है पूरी तरह बंद
तो आओ धर्म पे बात करें

समाज के सभी घर अगर
लड़की के जन्म पे असंतोष के
आखिरी एहसास को छोड़ चुके हैं
बहुत पीछे
अगर अब लड़की का बाप उसकी शादी
के सफ़ल आयोजन को जंग जीतने की
संज्ञा नहीं देता
तो आओ धर्म पे बात करें 

अगर हर मर्द ने हर औरत को
इक खूबसूरत जिस्म
समझना छोड़ दिया है
और हर औरत ने छोड़ दिया है
मर्द को समझना सहारे की ज़रूरत
तो आओ धर्म पे बात करें 

अगर कला ,साहित्य ,संगीत अब
समझे जाने लगे हैं काम
भूख से हारकर लोग नहीं
घोट रहे सपनों का गला
अगर नफ़रत की जगह ले ली
है स्वस्थ प्रतिस्पर्धा ने तो
आओ धर्म पे बात करें।

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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8 वर्ष पहले

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