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ये एहसास खुद में पाते हैं:....

                
                                                         
                            दिल के झरोखे में
                                                                 
                            
बैठाया है
ख्वाब एक सजाया है
ना इनकार करते हैं
ना इकरार करते हैं
लेकिन हद से
ज्यादा परवाह करते हैं
मुहब्बत की तो पता नहीं
सुबह शाम तुम्हारा
इंतजार करते हैं
तुम्हारे ख्याल मात्र से ही
खुशियों से भर जाते हैं
शायद "कविता"
हम कुछ कहना चाहते हैं
जो कह नहीं पाते हैं
कलम उठती तो रुकती नही
शब्दों को संजोने में चूकती नहीं
ये हम आज खुलेआम कहते हैं
खुद से ज्यादा तुम्हारा
ख्याल रखते हैं
दिल की तमन्ना को
कविता का नाम देते हैं
कभी कभी खाना भी खाना है
ये बात भूल जाते हैं
तुम्हारी चाहतों में
इतने मशगूल हो जाते हैं
तुम दिल की धड़कन हो
ये एहसास खुद में पाते हैं।।
-ममता तिवारी
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4 महीने पहले

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