आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

रह जाते धरती पर सदा:......

                
                                                         
                            रहते हैं धरती पर सदा
                                                                 
                            
जो दूसरों के लिए जीते हैं
वे दीये बुझते नहीं..…....
जो औरों के लिए जलाये जाते हैं
अपने जीवन के अंधेरों के साथ-साथ
दूसरों का अंधेरा हरते हैं
आजीवन अमर हो जाते हैं
जो औरों को उजाले देते हैं
अपने आंखों के सैलाब को
अमृत समझ कर पीते हैं
वही असली जिंदगी जीते हैं
जो गमों में भी खुशी ढूंढ लेते हैं
धीरज धरना आगे बढ़ना यही
असली मनुष्य के कारनामे होते हैं
वह विचलित कहां होते सुरमा
जो हिम्मत की मिट्टी से बने होते हैं
रह जाते धरती पर सदा...........
जो दूसरों के लिए जीते।।
-ममता तिवारी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर