रहते हैं धरती पर सदा
जो दूसरों के लिए जीते हैं
वे दीये बुझते नहीं..…....
जो औरों के लिए जलाये जाते हैं
अपने जीवन के अंधेरों के साथ-साथ
दूसरों का अंधेरा हरते हैं
आजीवन अमर हो जाते हैं
जो औरों को उजाले देते हैं
अपने आंखों के सैलाब को
अमृत समझ कर पीते हैं
वही असली जिंदगी जीते हैं
जो गमों में भी खुशी ढूंढ लेते हैं
धीरज धरना आगे बढ़ना यही
असली मनुष्य के कारनामे होते हैं
वह विचलित कहां होते सुरमा
जो हिम्मत की मिट्टी से बने होते हैं
रह जाते धरती पर सदा...........
जो दूसरों के लिए जीते।।
-ममता तिवारी
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