इंसानी फितरत
भी अजीब है
हसरतों के पीछे
जिंदगी जीते नहीं
हसरत पूरी होती नहीं
जिंदगी कब पूरी हो जाती
ये पता चलते नहीं।।
-ममता तिवारी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X