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मुन्नी जिद करने लगी दादी जी से: बाल कविता

                
                                                         
                            मुन्नी जिद करने लगी दादी जी से
                                                                 
                            
पढ़ाओ दादी जी मुझे अभी से
आज नहीं तो कभी नहीं
मत मारिएगा मुझे छड़ी से
पढ़ने का वक्त हो गया है
समय देखकर आई हूं घड़ी से
दादी जी बोली, इतनी छोटी बच्ची है
पढ़ने के लिए क्यों जिद करती है
खेलने की अभी उम्र है तुम्हारी
बड़ों सी हरकत करती है
डरती नहीं छड़ी से मेरी
जिद लेकर खड़ी है
बुलाती हूं अभी पापा जी को तुम्हारे
पहले स्कूल में एडमिशन करेंगे
पढ़ने का तुमको परमिशन देंगे
फिर मैं भी तुमको पढ़ाऊंगी
सुंदर-सुंदर कहानी सुनाऊंगी
सच्चाई के पथ पर चलना सिखाऊंगी
तुमको मैं होनहार बनाऊंगी
जिद अभी छोड़ दो
थोड़ा और बड़ी हो जाओ
चलो अभी खेलते हैं
बाद में मिलकर पढ़ते हैं।।
-ममता तिवारी
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6 महीने पहले

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