आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

लिखूं मैं कविता:......

                
                                                         
                            लिखूं मैं कविता
                                                                 
                            
कलम मेरे हाथ में दो
एक मेहरबानी तुम
मुझ पर तुरंत कर दो
लिखना मुझे अच्छा लगता
कैसे बिना लिखे रहूं मैं
एक मिनट चैन नहीं पड़ता
बेचैन कैसे रहूं मैं
शांति के लिए मुझे लिखने दो
लिखकर ही चैन पाऊं मैं
एक रहम मुझ पर
आज अभी कर दो
बेचैन हूं बहुत मैं
मेरे हाथों में कलम दो
बहलाना छोड़ो
मुझे अभी लिखने दो
लिखूं मैं कविता
मेरे हाथों में कलम दो।।
-ममता तिवारी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर