लिखूं मैं कविता
कलम मेरे हाथ में दो
एक मेहरबानी तुम
मुझ पर तुरंत कर दो
लिखना मुझे अच्छा लगता
कैसे बिना लिखे रहूं मैं
एक मिनट चैन नहीं पड़ता
बेचैन कैसे रहूं मैं
शांति के लिए मुझे लिखने दो
लिखकर ही चैन पाऊं मैं
एक रहम मुझ पर
आज अभी कर दो
बेचैन हूं बहुत मैं
मेरे हाथों में कलम दो
बहलाना छोड़ो
मुझे अभी लिखने दो
लिखूं मैं कविता
मेरे हाथों में कलम दो।।
-ममता तिवारी
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