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खुद को लगा गले:.......

                
                                                         
                            मन की मायूसी हटा
                                                                 
                            
कि हृदय को हृदय से
मिलने का मौका मिले
यूं ना रहा करो मौन
कि खुद ही खुद की
खबर ना मिले
रुसवाईयां बहुत है
जमाने में
खुद से क्यों गिले
क्या तुमने कभी
खुद को नहीं
लगाया गले
जमाने ने ढाहे
बहुत सितम
थोड़ा सब्र तो कर ले
वक्त का भी
वक्त आता है
अपने जख्मों को
खुद ही एक बार भर ले
मन की मायूसी हटा
कि एक बार हृदय को
हृदय से मिलने का मौका मिले।।
-ममता तिवारी
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4 महीने पहले

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