कोरे कागज भी मुस्कुरा उठते हैं
जब कलम हमारी चलने लगती है
मन के भाव भी पन्नों पर कदम रखने लगते हैं
जब कलम आवाज लगाने लगती है
एहसासों को भी एहसास हो जाते हैं
जब कलम मुस्कुराने लगती है
ग़म भी दफा हो जाते हैं
जब कलम गीत खुशी के गाने लगती है
कोरे कागज भी हँसने लगते हैं
जब स्याही की खुशबू पाने लगते हैं
दिल के जज्बात भी जीवंत हो उठते हैं
जब कलम जान डाल देती है
कोरे कागज भी मुस्कुरा उठते हैं
जब कलम भावनाओं को सजाने लगती है
ग़मगीन मंज़र भी रंगीन हो जाते हैं
जब कलम ख़ुशी के रंग बिखेरने लगती है
हर तरफ हरियाली छा जाती है
बहार आ जाती है
जब खुशियों की बरसात होने लगती है
जब कलम बारिश की फुहार बन
बरसने लगती है...................।।
-ममता तिवारी
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