आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

बड़ा मकसद से:....…..

                
                                                         
                            एक बड़े मकसद से
                                                                 
                            
जब आंखें खुलती है
आंखों में निराशा नहीं होती
एक गजब की तेज
हमारे अंतर्मन को
उज्ज्वलित करते हैं
मकसद आंखों के
इर्द-गिर्द चमकने लगते हैं
फिर हमारे मन में
एक खुशी की तरंगें
उठने लगती है हमारा
मन ऊर्जा से भर जाता है
हम काम करने के लिए
विवश हो जाते हैं
हमारे मन से आलस
रूपी दानव
खुद निकल जाता है
बड़ा मकसद बड़ा मकसद
होता है बड़े-बड़े काम
करने का हौसला देता है
इसलिए छोटा मकसद
लेकर कभी जागना मत
बड़ा मकसद बनाकर
जीवन में आगे बढ़ना
खुद ब खुद ताकत मिलेगी।।
-ममता तिवारी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर