काटो मत इस हरियाली को, इसको भी छाने का हक है।
मत रौंदों लहलहाती फसलें, इनको लहलहाने का हक है।।
मत तोड़ो खिलती कलियों को, इनको भी खिलने का हक है।
रवि - रश्मि और कोयल, तितली से, इनको भी मिलने का हक है।
नहीं सताओ तुम तितली को, इसको इठलाने का हक है।
सुन्दर फूलों, मधुर फलों का, इसको मधु पाने का हक है।।
मत कैद करो पंछी को जिसको, आजादी पाने का हक है।
दूर तलक फैले अंबर में, उसको उड़ जाने का हक है।।
मत रोको मेरे भावों को, इनको बह जाने का हक है।
जिसमें बसी प्रकृति हो कुछ, ऐसा कह जाने का हक है।।
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