समय मिला है तो गुण लो ना,
कुछ प्यार के पल चुन लो ना।
चुन लो कि क्या खोना है,क्या पाना है।
किसने कितना किया ये हिसाब तो लगाना है।
चुन लो क्या किया ,क्या पाया,
कुछ तो समझ है आया।
समय मिला है तो गुण लो ना,
कुछ प्यार के पल चुन लो ना।
चुन लो अपनों के प्रेम को,
सजा लो जिंदगी के फ्रेम को।
कितने तो मिले इस रहगुजर में,
बीते पल खुशियों और दुखों की लहर में।
समय मिला है तो गुण लो ना,
कुछ प्यार के पल चुन लो ना।
बचपन के आँगन में ,
खिलते फूलों की साया थी।
तरुनाई के पल में,
बुजुर्गों की छाया थी।
आज,वो छाया खुद बनो ना।
समय मिला है तो गुण लो ना,
कुछ प्यार के पल चुन लो ना।
-कुमारी प्रियंका
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