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इसी में बसा आनंद हमारा।

                
                                                         
                            बहती नदियां, उगता सूरज,
                                                                 
                            
दिखा रहे निरंतरता को।
अंधकार, प्रकाश का चक्र,
सिखा रहा नश्वरता को।
हरे पेड़, चहकती चिड़िया,
देते संदेश समर्पण का।
छोटे छोटे सुंदर जीव,
सिखाते संघर्ष जीवन का।

ठंडी हवा, तपती धूप,
सिखा रही संतुलन को।
गिरते पत्ते, खिलते फूल,
दिखा रहे परिवर्तन को।
ऊँचे पर्वत, गहरी झीलें,
देते पाठ अटल रहने का।
नन्ही चींटी, गाती कोयल,
अर्थ सिखाती मेहनत का।

सीख ले हम जो इनसे,
मिट जाएगा हर द्वंद्व हमारा।
प्रकृति ही सच्चा गुरु है,
इसी में बसा आनंद हमारा।
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एक दिन पहले

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