आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत है।

                
                                                         
                            सुकून नहीं मिलता बाहर,
                                                                 
                            
अन्तरात्मा में ढूंढने में,
जीवन निकल जाता है।
खुशी पैसे से मिल सकती है,
सुख नसीब से आता है,
यह सब क्षणिक होते हैं,
एक आवश्यकता पूरी हुई,
तब दूसरी जरुरत पर ,
मन मचलने लगता है।
सुकून प्रारब्ध से मिलता है,
शान्ति की चाहत में,
जीवन निकल जाता है,
जरुरी नहीं कि शान्ति,
सुकून मिल ही जाए।
सुकून अध्यात्म से जुड़ा है,
सुकून सूफियाना अंदाज है,
सुकून संत मत की पहचान है,
सुकून आडम्बरों से निकलकर,
आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत है।
आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत है।
-कुलदीप शुक्ला
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
36 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर