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सपनों का घर

SAPNON KA GHAR
                
                                                         
                            सपनों का घर
                                                                 
                            
पाई पाई जोड़ जोड़ कर,
पोर पोर को तोड़ तोड़ कर,
सुन्दर सपनों जैसा,
बच्चों के मन माफिक जैसा,
तस्सवुर में सोचा था वैसा,
घरौंदा मैने एक बनाया,
रंग बिरंगी सजावटों से मैने उसे सजाया,
बच्चों के लिए पींग और माँ के लिए झूला भी लगवाया,
पर किस्मत को नामंजूर हुवा,
घरोंदा एक ही तूफान में चकनाचूर हुवा,
न जाने किस जन्म के कर्मों,
की मिली है ये सज़ा,
बना बनाया घरोंदा मेरा हुवा तबाह,
तेरा शुक्रगुज़ार हूँ ए खुदा,
दिए हैं हाथ पैर सलामत मुझे,
फिर करूँगा कोशिश एक वारी,
किस्मत को फिर अजमाउंगा,
तस्सवुर के नक्शे जैसा,
गर रज़ा होगी तेरी तो,
घरोंदा फिर बनाऊंगा.

- कुल भूषण  
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3 वर्ष पहले

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