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लम्हे

                
                                                         
                            अंजुरी भर लम्हे बहुत हैं जिंदगी के लिए,
                                                                 
                            
एक एक लम्हे का उपयोग करो,
बहुत है एक ही लम्हा,
जो जिंदगी संवार दे,
वरन एक ही लम्हा तो है,
जब जिंदगी 
जिंदगी नहीं रहती,
तुम्हें तो खुदा ने अंजुरी भर लम्हे दिए हैं,
सम्हालो इन्हे,
आज के लम्हे न जाने कब,
जिंदगी में काम आएं,
हर लम्हा कुछ न कुछ कहता है,
कोई लम्हा गीत बन जाता है,
कोई संगीत बन जाता है,
और कोई लम्हा तो,
जिंदगी का मीत बन जाता है,
और कोई तो जिंदगी ही छीन लेता है,
कोई तो गैरों को अपना बना कर,
एक नया तराना सुना जाता है,
कभी खुशी का एक लम्हा,
अपनों से मांग कर देखो,
वो गैर तो बन ही जायेंगे,
पूरा जमाना भी दुश्मन बन जाता है,
हर लम्हा कुछ न कुछ कहता है,
कभी पढ़ने की कोशिश तो कर देखो,
कई अनकहे किस्से और फसाने मिलेंगे,
जो तुम्हें दूसरी दुनिया से रूबरू कराएंगे,
लम्हा दर लम्हा यूं ही गुजरता चला जायेगा,
वक्त से कुछ लम्हें चुरा लो दोस्तों,
न जाने वक्त कब हाथ से फिसल जायेगा....
-कुल भूषण 
 
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3 वर्ष पहले

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