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गौरैया

                
                                                         
                            सुबह सवेरे जब नींद सुहाती,
                                                                 
                            
खिड़की पर ठक ठक करके,
नींद से तू मुझे रोज जगाती,
जब से पेड़ कटा आंगन का,
रहने लगी थी तू उदास,
इंसानों संग रहने की खातिर,
रोशनदान को घर बना कर,
उसमें अपना संसार बसाया,
फिर आई AC की बारी,
रोशनदान भी बंद कराया,
AC लगने से पहले तुमने,
याद है कैसा था शोर मचाया,
कोई न जान सका तेरे मन को,
सबने तुझको दूर भगाया,
ओ री गौरैया कहां है तू,
और कहां गई तेरी चीं चीं गौरैया,
कौन जगाए ठक ठक करके,
तुझ को मिस करते हैं गौरैया.
-कुल भूषण
 
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3 वर्ष पहले

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